Wednesday, July 29, 2026
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उत्तराखंड में बर्फबारी से सजी पहाड़ियां, पर्यटन स्थलों पर लौटी रौनक

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदलते ही पहाड़ों पर बर्फबारी के खूबसूरत नजारे देखने को मिल रहे हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में हुई ताजा बर्फबारी ने पर्वतीय क्षेत्रों को सफेद चादर से ढक दिया है, जिससे ठंड में इजाफा हुआ है।

चकराता से लेकर गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा तक बर्फ गिरने से पूरे क्षेत्र में शीतलहर का असर दिखाई देने लगा है। पहाड़ों पर बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही हैं।

बर्फबारी के बाद पर्यटन स्थलों पर उत्साह और रौनक लौट आई है। बड़ी संख्या में सैलानी बर्फबारी का आनंद लेने पहाड़ी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। होटल व्यवसायियों और स्थानीय कारोबारियों को भी इससे अच्छी उम्मीदें नजर आ रही हैं।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और बढ़ सकती है। प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों से सतर्कता बरतने की अपील की है।

23 जनवरी को बारिश–बर्फबारी का अलर्ट, शासन ने सभी एजेंसियों को रखा एलर्ट मोड पर

देहरादून। मौसम विभाग द्वारा 23 जनवरी को प्रदेश में बारिश व बर्फबारी की चेतावनी जारी किए जाने के बाद शासन ने सभी कार्यदायी एजेंसियों को एलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। खराब मौसम की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने इस संबंध में सभी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम खराब होने की स्थिति में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए। विशेष रूप से पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, पेयजल, पशुपालन एवं नगर निकाय विभागों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने को कहा गया है।

सचिव ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील, दूरस्थ एवं उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूर्व से ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका को देखते हुए संवेदनशील और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जेसीबी, स्नो कटर तथा अन्य आवश्यक मशीनरी की अग्रिम तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी जिलों में संवेदनशील सड़कों, पुलों एवं पैदल मार्गों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि जनहानि और अव्यवस्था से बचा जा सके।

उत्तराखंड के उच्च हिमालय में मिला दुर्लभ चागा मशरूम, औषधीय गुणों को लेकर बढ़ी वैज्ञानिकों की रुचि

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रकृति का एक अनमोल औषधीय खजाना सामने आया है। जड़ी-बूटी शोध संस्थान, मंडल से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट ने पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र के बालिंग और सीपू जैसे दुर्गम इलाकों में दुर्लभ चागा मशरूम की पहचान की है। यह खोज औषधीय अनुसंधान की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वैज्ञानिकों के अनुसार चागा मशरूम (इनोनोटस ओब्लिक्वस) केवल उन्हीं भोजपत्र के पेड़ों के तनों पर उगता है, जिनकी आयु 100 वर्ष से अधिक होती है। अब तक यह माना जाता रहा है कि यह मशरूम मुख्य रूप से साइबेरिया और रूस के ठंडे जंगलों तक ही सीमित है, लेकिन धारचूला और नीति घाटी में 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी ने शोधकर्ताओं को उत्साहित कर दिया है। देखने में यह जले हुए कोयले या मधुमक्खी के छत्ते जैसा भूरा-काला दिखाई देता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत

चागा मशरूम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग बताई जाती है। दिल्ली समेत देश के बड़े महानगरों में रूस और साइबेरिया से आयातित चागा मशरूम 25 से 30 हजार रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसके संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से दोहन की दिशा में काम किया जाए, तो सीमांत क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए यह आजीविका का एक नया साधन बन सकता है।

औषधीय चाय के रूप में उपयोग

डॉ. विजय भट्ट के अनुसार चागा मशरूम को वैज्ञानिक विधि से सुखाकर उसका पाउडर तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग शहद के साथ हर्बल चाय के रूप में किया जाता है। इसमें विटामिन-डी2, पॉलीसैकेराइड्स और कई आवश्यक खनिज तत्व पाए जाते हैं। डॉ. भट्ट ने यह चाय बेंगलुरु, दिल्ली और चंडीगढ़ के कुछ मरीजों तक भेजी है, जहां से उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं। हालांकि वे इसे पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक आहार के रूप में देखते हैं।

क्यों खास है चागा मशरूम

  • दुर्लभ विकास: यह केवल 100 वर्ष से अधिक पुराने भोजपत्र के पेड़ों पर परजीवी के रूप में उगता है।

  • इम्यून सपोर्ट: शोधों में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहारा देने वाला माना गया है।

  • एंटी-ऑक्सीडेंट गुण: इसमें पाए जाने वाले तत्व कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में सहायक बताए जाते हैं।

  • मेटाबॉलिक संतुलन: कुछ अध्ययनों में इसके शुगर नियंत्रण और डिटॉक्स प्रभावों पर भी काम हुआ है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉ. विजय भट्ट ने स्पष्ट किया है कि जंगली मशरूमों की पहचान बेहद कठिन होती है। बिना विशेषज्ञ सलाह के किसी भी प्रकार के मशरूम का सेवन जानलेवा हो सकता है। इसलिए चागा मशरूम के उपयोग से पहले वैज्ञानिक पुष्टि और चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।

यह खोज न केवल उत्तराखंड की जैव विविधता को नई पहचान देती है, बल्कि भविष्य में औषधीय अनुसंधान और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के द्वार भी खोलती है।

प्रदेश में सूखी ठंड का असर, छह जिलों में कोहरे का येलो अलर्ट

उत्तराखंड में भले ही बारिश और बर्फबारी नहीं हो रही हो, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में पाले और मैदानी इलाकों में शीतलहर के कारण सूखी ठंड बढ़ती जा रही है। सुबह-शाम ठंड का असर तेज बना हुआ है, हालांकि दिन के समय खिल रही धूप से लोगों को कुछ राहत मिल रही है।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज 13 जनवरी को प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहेगा। इस बीच देहरादून समेत छह जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार को मैदानी जिले देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के साथ ही नैनीताल, चंपावत और पौड़ी में कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है।

आने वाले दिनों के मौसम की बात करें तो 16 जनवरी तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहने के आसार हैं। वहीं 17 और 18 जनवरी को मौसम का मिजाज बदल सकता है। इन दिनों प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने कोहरे और ठंड को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों के घायलों के इलाज पर सरकार उठाएगी 15 लाख रुपये तक का खर्च

देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमले में घायल होने वाले लोगों को अब बेहतर और महंगा इलाज मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ऐसे घायलों के उपचार पर कुल 15 लाख रुपये तक का खर्च वहन करेगी। इसमें पांच लाख रुपये तक का इलाज अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत होगा, जबकि शेष 10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग से राय मांगी गई है। शासनादेश शीघ्र ही जारी किए जाने की संभावना है। हालांकि, औपचारिक आदेश जारी होने से पहले ही शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वन्यजीव हमले की किसी भी घटना में घायलों के समुचित और त्वरित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। गुलदार, बाघ, भालू और हाथियों के बढ़ते हमलों से ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। हाल के वर्षों में सरकार ने इस संघर्ष को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन घटनाओं में कमी नहीं आ पाई है।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही राज्य सरकार ने वन्यजीव हमलों में मृत्यु होने पर मुआवजा राशि को छह लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया था। वहीं, घायलों को अब तक मानव-वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि के तहत 15 हजार से तीन लाख रुपये तक का मुआवजा ही मिलता था। नियमावली में उपचार के खर्च का अलग से कोई प्रावधान नहीं था, हालांकि सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी जाती थी।

प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने बताया कि वन्यजीवों के हमले में घायल व्यक्तियों के उपचार के लिए अटल आयुष्मान योजना के अतिरिक्त 10 लाख रुपये तक का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। जल्द ही शासनादेश जारी किया जाएगा। साथ ही, सभी जिलाधिकारियों को घायलों के बेहतर उपचार के निर्देश दे दिए गए हैं।

सरकार के इस फैसले से वन्यजीव हमलों के शिकार लोगों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग: पुलिस कांस्टेबल भर्ती में 12 जनवरी से दस्तावेज सत्यापन शुरू

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पुलिस कांस्टेबल भर्ती के तहत अभ्यर्थियों के अभिलेख (दस्तावेज) सत्यापन की प्रक्रिया 12 जनवरी से शुरू करेगा। आयोग ने शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक सूचना जारी कर दी है।

जारी कार्यक्रम के अनुसार, सीरियल नंबर 1 से 50 तक के अभ्यर्थियों का सत्यापन 12 जनवरी को किया जाएगा। वहीं 51 से 100 तक का 13 जनवरी, 101 से 150 तक का 14 जनवरी, 151 से 200 तक का 15 जनवरी और 201 से 250 तक के अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन 16 जनवरी को होगा।

आयोग ने बताया कि अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपनी वरीयता (प्रेफरेंस) भर सकते हैं। दस्तावेज सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी दर्ज की जाएगी।

दस्तावेज सत्यापन से संबंधित विस्तृत जानकारी, आवश्यक दस्तावेजों की सूची और अन्य दिशा-निर्देश आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित तिथि को सभी आवश्यक मूल दस्तावेजों के साथ समय पर उपस्थित हों।

उत्तराखंड में सूखी ठंड का कहर, मैदानी इलाकों में घना कोहरा, पहाड़ों में शीतलहर

उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी नहीं होने का सीधा असर अब तापमान पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेशभर में सूखी ठंड लोगों को परेशान कर रही है। पर्वतीय इलाकों में शीतलहर और पाले का असर बना हुआ है, जबकि मैदानी जिलों में घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने 10 जनवरी को देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार सहित नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। कोहरे के चलते सुबह और रात के समय दृश्यता कम रहने से यातायात पर भी असर पड़ रहा है।

हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में दिन के समय धूप निकलने से लोगों को ठंड से कुछ राहत मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 15 जनवरी तक मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है, जिससे फिलहाल बारिश या बर्फबारी के आसार नहीं हैं।

शुक्रवार को देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक 22.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम होकर 4.6 डिग्री रहा। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान का रुख कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

मौसम विभाग ने लोगों को सुबह-शाम सतर्क रहने और कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

शुष्क मौसम के बीच ठंड का कहर, कोहरा और पाले से बढ़ी मुश्किलें

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम फिलहाल शुष्क बना हुआ है। पहाड़ से लेकर मैदान तक दिन के समय तेज धूप से लोगों को कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन सुबह और शाम कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में पाले का प्रकोप जारी है, जबकि मैदानी इलाकों में घना कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।

कई क्षेत्रों में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आगामी कुछ दिनों तक प्रदेशभर में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं।

मौसम विभाग ने बताया कि पहाड़ों में पाला किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है और इससे फसलों को नुकसान होने की आशंका है। वहीं हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर सहित अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा छाने और शीत दिवस की स्थिति बनने को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।

इसके अलावा ऊधम सिंह नगर जनपद में कहीं-कहीं शीत दिवस की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है, खासकर सुबह-शाम यात्रा करने वालों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की रिव्यू मीटिंग में हिस्सा लिया। इस दौरान, राज्य में सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति को दिखाने वाला एक डिटेल वीडियो प्रेजेंटेशन भी पेश किया गया। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई है। चार धाम यात्रा को आसान, सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए, चार धाम हाईवे प्रोजेक्ट के तहत 12,769 करोड़ रुपये की लागत से प्रमुख नेशनल हाईवे को अपग्रेड किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा बैठक में भाग लिया। इस दौरान उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति को दर्शाने वाला एक विस्तृत वीडियो प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सड़क अवसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा को आसान, सुलभ और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से चारधाम हाईवे परियोजना के अंतर्गत 12,769 करोड़ रुपये की लागत से राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का उन्नयन किया जा रहा है।

सीएम धामी ने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

नर्सिंग बेरोजगारों का मुख्यमंत्री आवास कूच

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देहरादून: नर्सिंग एकता मंच के नेतृत्व में सैकड़ों बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। उनकी मांगों में वर्षवार भर्ती निकालना, आयु सीमा में छूट देना समेत कई मुद्दे शामिल हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि वे कई दिनों से शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध नहीं ले रही, जिसके चलते उन्हें कूच करना पड़ा।

बेरोजगारों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में संघर्ष और एकता का हमेशा सकारात्मक परिणाम मिलता है। जिस दिन आपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, उस दिन भी आपको गिरफ्तार किया गया था।” उन्होंने बताया कि आवास घेराव से पहले उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से बात की, लेकिन मंत्री ने स्वयं को पश्चिम बंगाल में होने की जानकारी दी।

कूच के दौरान हाथीबड़कला क्षेत्र में करीब दो घंटे तक बेरोजगारों और पुलिस के बीच तनाव और धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान एक महिला प्रतिभागी के साथ महिला पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट करने का आरोप भी लगा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बेरोजगारों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद प्रदेश महिला कांग्रेस भी सक्रिय हो गई। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, विरोध आंदोलन जारी रहेगा।

 

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