Friday, July 31, 2026
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Journalist Rajeev Pratap Case : में बड़ा खुलासा, पुलिस ने पेश की टाइमलाइन

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उत्तरकाशी: Journalist Rajeev Pratap Case  पत्रकार राजीव प्रताप की मौत मामले में पुलिस ने अपनी विवेचना की अहम जानकारी दी है. पुलिस ने बताया पत्रकार राजीव प्रताप की हत्या नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना में मौत हुई है. पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना की रात को राजीव शराब के नशे में धुत था. वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था. सीसीटीवी कैमरे में राजीव को हाइवे पर रॉन्ग साइड गाड़ी चलाते हुए देखा जा सकता है. इसके साथ ही वह सीसीटीवी में लड़खड़ाते हुए भी साफ देखा जा रहा है.

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पुलिस उपाधीक्षक उत्तरकाशी जनक पंवार ने मामले की जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया 18 सितंबर को लगभग शाम सात बजे कोटी उत्तरकाशी का एक युवक मनबीर कलूड़ा जो पूर्व में गुमशुदा राजीव प्रताप का विद्यार्थी भी रहा है, राजीव प्रताप के साथ कैमरामैन का भी काम कर रहा था, दोनों साथ में ज्ञानसू स्थित राजीव के कमरे से निकलकर पुलिस लाईन में नियुक्त मुख्य आरक्षी सोबन से मिलने गए थे. यहां तीनों लोग पुलिस लाईन से पीछे ही शहीद स्मारक के आस पास मिले.

सोबन सिंह व राजीव प्रताप का ड्रिंक करने का प्लान बना. तीनों गाड़ी लेकर बाजार गए. शराब और अन्य खाने पीने की सामग्री लेकर वापस दरबार बैंड के सामने टैक्सी स्टैण्ड के पास पहुंचे. यहां से टैक्सी पार्किंग में ही बैठकर खाने पाने का प्रोग्राम बनाते हैं. रात लगभग 10 बजे तक तीनों लोगों का खाना-पीना चलचा रहा. उसके बाद सोबन सिंह वहां से उठकर अपने घर जाने के लिए गाड़ी निकाली, लेकिन राजीव प्रताप ने फोन पर रूकने के लिए कहा. फिर राजीव व सोबन सिंह का बाजार जाकर होटल में खाना खाने का प्लान बना. यहां बाजार में आकर दोनों ने फिर शराब खरीदकर एक होटल में खाना खाया.

बस अड्डे में लगे सीसीटीवी से पता चला कि रात 11.00 बजे राजीव प्रताप होटल से बाहर आते हैं. जिसमें वह लड़खडाते हुए देखा जा रहा है. थोड़ी देर बाद सोबन सिंह भी होटल से बाहर आता है. दोनों गाड़ी में बैठते हैं, लेकिन सोबन सिंह कुछ देर बाद गाड़ी से बाहर आ जाता है. राजीव प्रताप गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर आ जाते हैं. गाड़ी के अन्दर राजीव प्रताप के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बैठा नहीं दिखाई दिया. रात 11.24 बजे सोबन सिंह की कुछ सेकेंड बात राजीव प्रताप के मोबाइल पर होती है. गाड़ी बद्री तिराहा, तेखला पुल, अन्तिम बार समय 11.38 बजे रात गंगोरी पुल पर लगे सीसीटीवी. कैमरे में गंगोरी की ओर जाती हुई साफ दिखती है. अन्दर राजीव प्रताप के अलावा और कोई व्यक्ति बैठा हुआ नहीं दिखता है. गंगोरी पुल के बाद सीसीटीवी कैमरे बैंक एटीएम व पेट्रोल पम्प पर हैं. दोनों कैमरों की फुटेज चेक की गयी. राजीव प्रताप का वाहन उपरोक्त दोनों कैमरो में कहीं नहीं दिखाई दे रहा है.

पूछताछ करने पर सोबन सिंह ने बताया कि उसने होटल के सामने राजीव प्रताप को बहुत मनाया कि गाड़ी आगे मत ले जा. उसे नशा भी था. वह कभी- कभी गाड़ी चलाता था, तो इतना अच्छा नियन्त्रण भी नहीं था, लेकिन वह नहीं माना. सोबन ने पुलिस को बताया कि राजीव के कोट बंगला में बहन भी रहती है. उसने सोचा कि राजीव वहां गया होगा. वह आगे उजेली कोटबंगला की ओर पैदल पीछे-पीछे गया, लेकिन उसे राजीव नहीं मिला. फिर यह सोचकर कि सुबह गाड़ी ले लूंगा, वह वापस अपने कमरे में चला गया. इसके बाद 11.40 के बीच ही राजीव कहीं गायब हो गया. वह मनेरी की तरफ जाते हुए भी कैमरे में कहीं नहीं दिखा. अनुमान है कि इस बीच गंगोरी में नियंत्रण खोने पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. राजीव का शराब के नशे में लड़खड़ाना, रॉन्ग साइड गाड़ी चलाना और कभी कभार ही चौपहिया वाहन चलाना इस बात की आशंका पैदा करता है कि ये एक सड़क दुर्घटना थी. इस पूरे मामले की विवेचना एसआई दिलमोहन बिष्ट कर रहे हैं.

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Sonam Wangchuk : सोनम वांगचुक की पत्नी ने SC का दरवाजा खटखटाया

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नई दिल्ली: Sonam Wangchuk  लद्दाख में विरोध-प्रदर्शन के जिम्मेदार ठहराए गए सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बता दें, वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था.

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दो दिन पहले ही लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर केंद्र शासित प्रदेश में हुए विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे. वह इस समय राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं. आंग्मो ने वकील सर्वम रीतम खरे के माध्यम से दायर अपनी याचिका में वांगचुक की नजरबंदी को चुनौती दी है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है. याचिका में वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं.

अंगमो ने आरोप लगाया कि उन्हें अभी तक हिरासत आदेश की कॉपी नहीं मिली है, जो नियमों का उल्लंघन है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अभी तक उनका वांगचुक से कोई संपर्क नहीं हुआ है. हाल ही में लद्दाख प्रशासन ने वांगचुक के खिलाफ ‘जासूसी’ के दावों को खारिज कर दिया था.

इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी ने पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना भी की थी. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक को केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है. यह एक मनगढ़ंत चाल है. उन्होंने सुरक्षाबलों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सीआरपीएफ को गोली चलाने का आदेश किसने दिया. कौन अपने ही लोगों पर फायरिंग करता है और खासकर ऐसा इलाका जहां आज तक कोई विरोध-प्रदर्शन नही हुआ है.

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सोनम वांगचुक केवल शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए थे. वे किसी को भी भड़का नहीं सकते. इन सबके बारे में उन्हें कोई जानकारी भी नहीं थी.

Vijayadashami 2025 : राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

Mahatma Gandhi Jayanti 2025 : गांधी जयंती पर CM धामी ने श्रद्धांजलि अर्पित की

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देहरादून : Mahatma Gandhi Jayanti 2025  मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने सत्य, अहिंसा और त्याग के मार्ग से पूरे विश्व को शांति और एकता का संदेश दिया। उनका जीवन दर्शन आज भी समाज को नई दिशा देने वाला है। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से गांधीजी के विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी की प्रेरणा से ही हमें स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सादगी का संदेश मिलता है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।

 

 

 

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून स्थित शहीद स्थल कचहरी परिसर में राज्य आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आन्दोलनकारियों और शहीदों के परिजनों के कल्याण हेतु निरंतर संकल्पित है तथा उनके हितों और सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों के सपनों के अनुरूप एक समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।

Chhannu Lal Mishra : पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन,पीएम मोदी ने जताई संवेदना

Vijayadashami 2025 : राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

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नई दिल्ली। Vijayadashami 2025 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विजयादशमी के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस त्योहार को सत्य और धर्म की जीत का प्रतीक बताते हुए देशवासियों से साहस, बुद्धिमत्ता और भक्ति के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेने की कामना की।

Chhannu Lal Mishra : पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन,पीएम मोदी ने जताई संवेदना

विजयादशमी या दशहरा शारदीय नवरात्रि के समापन पर मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के आश्विन मास की दशमी तिथि को यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व हर किसी को सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की शक्ति देता है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “विजयादशमी अच्छाई और सत्य की बुराई और असत्य पर विजय का प्रतीक है। मेरी कामना है कि इस पवित्र अवसर पर सभी को साहस, बुद्धि और भक्ति के पथ पर निरंतर प्रगति करने की प्रेरणा मिले।”

राष्ट्रपति मुर्मु ने भी दी शुभकामनाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने X पोस्ट में लिखा कि यह त्योहार धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है और हमें सत्य व न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने रावण दहन और दुर्गा पूजा जैसे उत्सवों को राष्ट्रीय मूल्यों का प्रतीक बताया, जो हमें क्रोध और अहंकार जैसे नकारात्मक गुणों को त्यागकर साहस और दृढ़ता अपनाने का संदेश देते हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कामना की कि यह पर्व समाज और देश को न्याय, समानता और सौहार्द के विचारों से प्रेरित करे, ताकि सभी लोग एक साथ प्रगति करें।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी दी शुभकामना संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विजयादशमी पर अपने शुभकामना संदेश में कहा, “सत्य, धर्म, मूल्यों और शाश्वत सिद्धांतों की विजय का प्रतीक यह महान पर्व सभी को हार्दिक बधाई।”

उन्होंने प्रभु श्रीराम की कृपा से हर दिल में धर्म और सत्य का प्रकाश फैलने की कामना की।

क्यों मनाई जाती है विजयादशमी?

विजयादशमी शब्द ‘विजय’ यानी जीत और ‘दशमी’ यानी दसवें दिन से मिलकर बना है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है।

देशभर में इसे रावण दहन, दुर्गा पूजा और अन्य परंपराओं के साथ उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह हमें नैतिकता, साहस और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

Gandhi Jayanti 2025 : पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को किया नमन

Chhannu Lal Mishra : पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन,पीएम मोदी ने जताई संवेदना

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Chhannu Lal Mishra : शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया है। उनका निधन आज सुबह 5 बजे मिर्जापुर आवास में हुआ। पंडित छन्नूलाल मिश्र (89) को बीते शनिवार को दिल का दौरा पड़ गया था। परिवार के सदस्यों ने उन्हे मिर्जापुर के ओझला स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था।

Gandhi Jayanti 2025 : पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को किया नमन

छन्नू लाल मिश्र लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी पीठ में बेड सोर होने के साथ ही शरीर में खून की कमी हो गई थी। उनकी पुत्री और केबी कॉलेज की प्रो. नम्रता मिश्रा ने बताया था कि बाबूजी को दिल का दौरा पड़ने के बाद डॉक्टरों ने जांच की। यहां दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। आज सुबह उनकी बेटी नम्रता ने बताया कि पिता का निधन हो गया है।

नम्रता मिश्रा ने कहा, ‘आज सुबह सवा 4 बजे हमारे निवास स्थान गंगा दर्शन कॉलोनी, मिर्जापुर में उन्होंने अंतिम सांसें ली हैं और वह बीमार काफी समय से चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शाम को मणिकर्णिका घाट पर होगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!’

पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार को सुबह 4:15 पर उनकी पुत्री नम्रता मिश्रा के गंगादर्शन कॉलोनी स्थित निवास पर निधन हो गया। पंडित छन्नुलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के हरिहरपुर गाँव में हुआ था।उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर बनारस में संगीत की विधिवत शिक्षा ली।

वहां उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खां से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की। मिश्राजी बनारस घराने की गायकी, विशेषकर ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी प्रस्तुतियां भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई। वे पूरब अंग की ठुमरी के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं और उनके अनेक संगीत एल्बम जारी हुए हैं।

पंडित छन्नुलाल मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया। वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी अलंकृत किए गए थे।

Uttarakhand Heli Services : पिथौरागढ़-मुनस्यारी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा हेली सेवाओं का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

 

Gandhi Jayanti 2025 : पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को किया नमन

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Gandhi Jayanti 2025 :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी की जयंती पर आज राजघाट पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गांधी जयंती के अवसर पर पीएम मोदी ने राष्ट्रपिता को नमन किया और उनके आदर्शों को याद किया।इस मौके पर उनके साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी मौजूद रहे।

Uttarakhand Heli Services : पिथौरागढ़-मुनस्यारी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा हेली सेवाओं का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

गांधी जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि गांधी जयंती, प्रिय बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि देने का दिन है। जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा बदल दी। उन्होंने दिखाया कि कैसे साहस और सादगी महान परिवर्तन के साधन बन सकते हैं। वे सेवा और करुणा की शक्ति को लोगों को सशक्त बनाने के अनिवार्य साधन मानते थे। हम एक विकसित भारत के निर्माण के अपने अभियान में उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे।

विजय घाट पहुंच पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रृद्धांजलि

बापू के श्रृद्धांजलि देने के बाद पीएम मोदी विजय घाट पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले उन्होंने एक्स लिखा कि लाल बहादुर शास्त्री जी एक असाधारण राजनेता थे। जिनकी ईमानदारी, विनम्रता और दृढ़ संकल्प ने चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत को सशक्त बनाया। वे अनुकरणीय नेतृत्व, शक्ति और निर्णायक कार्रवाई के प्रतीक थे। ‘जय जवान जय किसान’ के उनके आह्वान ने हमारे लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई। वे हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करते रहते हैं।

महात्मा गांधी की 156वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार ने देशवासियों से महात्मा गांधी के आदर्शों का पालन करने और स्वच्छ, अधिक सक्षम और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अस्पृश्यता, अशिक्षा और नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

Mohsin Naqvi : BCCI से Mohsin Naqvi ने मांगी माफी; मेडल लौटाने से किया इनकार

Uttarakhand Heli Services : पिथौरागढ़-मुनस्यारी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा हेली सेवाओं का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

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देहरादून : Uttarakhand Heli Services   मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान योजना) के अंतर्गत पिथौरागढ़-मुनस्यारी-पिथौरागढ़ एवं हल्द्वानी-अल्मोड़ा-हल्द्वानी हवाई सेवाओं का मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन हवाई सेवाओं के शुरू होने से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में आम नागरिकों का आवागमन सुगम होगा।

Mohsin Naqvi : BCCI से Mohsin Naqvi ने मांगी माफी; मेडल लौटाने से किया इनकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्मोड़ा और मुनस्यारी उत्तराखंड के प्राचीन नगर होने के साथ ही ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हैं। ये शहर प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक मंदिरों और समृद्ध संस्कृति के लिए देश और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हेली सेवा शुरू होने से अब पर्यटक अल्मोड़ा और मुनस्यारी तक और भी आसानी से पहुँच सकेंगे। इन सेवाओं से हल्द्वानी से अल्मोड़ा पहुँचने का समय 3 से 4 घंटे से घटकर महज़ कुछ मिनटों का रह जाएगा। हेली सेवाओं के प्रारंभ होने से दोनों क्षेत्रों में पर्यटन एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उड़ान योजना जैसी दूरदर्शी योजना प्रारंभ की थी। इस योजना ने प्रदेश में हवाई संपर्क को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके अंतर्गत राज्य के कई हिस्सों में हवाई पट्टियों और हेलीपोर्ट्स का विकास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 18 हेलीपोर्ट्स से हेली सेवाओं के संचालन की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिनमें से अब तक 12 हेलीपोर्ट्स पर सेवाएँ सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हेली सेवाओं (Uttarakhand Heli Services) से अब तक गौचर, जोशियाड़ा, हल्द्वानी, मुनस्यारी, मसूरी, पिथौरागढ़, पंतनगर, चंपावत, बागेश्वर, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी हेली सेवाओं से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हवाई संपर्क को सशक्त बनाने के साथ ही उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जौलीग्रांट और पंतनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं के लिए विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पिथौरागढ़ -मुनस्यारी -पिथौरागढ़ एवं हल्द्वानी-अल्मोड़ा-हल्द्वानी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा सप्ताह में 7 दिन तथा प्रत्येक दिन दो बार संचालित होगी। पिथौरागढ़ से मुनस्यारी के लिए यह हेली सेवा सुबह 10:30 बजे एवं दोपहर 1:50 बजे चलेगी। वहीं मुनस्यारी से पिथौरागढ़ के लिए यह सेवा सुबह 10:50 बजे एवं दोपहर 2:10 बजे चलेगी।

हल्द्वानी से अल्मोड़ा के लिए हेली सेवा सुबह 11:50 बजे एवं दोपहर 3:10 बजे चलेगी। जबकि अल्मोड़ा से हल्द्वानी के लिए यह सेवा दोपहर 12:50 बजे एवं सायं 4:10 बजे चलेगी। इन हवाई सेवाओं का किराया ₹2500 है, जिसे यात्री https://airheritage.in/ के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।

कार्यक्रम में सचिव युकाडा श्री सचिन कुर्वे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी युकाडा श्री आशीष चौहान एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Uttarkashi Journalist death case : पत्रकार राजीव प्रताप की मौत का SIT करेगी मामले की जांच

Mohsin Naqvi : BCCI से Mohsin Naqvi ने मांगी माफी; मेडल लौटाने से किया इनकार

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Mohsin Naqvi : पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान सरकार के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने एसीसी की मीटिंग में बीसीसीआई से माफी मांगी है। मोहसिन ने बीसीसीआई से माफी तो मांग ली, लेकिन उन्होंने अभी भी एशिया कप ट्रॉफी को भारत को लौटाने वापस करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव खुद एसीसी के ऑफिस आकर ट्रॉफी ले जाएं। इसका मतलब ट्रॉफी को लेकर चल रहा ये विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।

Uttarkashi Journalist death case : पत्रकार राजीव प्रताप की मौत का SIT करेगी मामले की जांच

Mohsin Naqvi ने BCCI से मांगी माफी

दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम ने एशिया कप 2025 के फाइनल मैच में पाकिस्तान को 5 विकेट से मात दी और 9वीं बार एशिया कप का खिताब जीता। भारतीय टीम के इस खिताब के जीतने के बाद ट्रॉफी को लेकर जमकर विवाद हुआ, जो अभी तक थमा नहीं है।

भारतीय टीम ने एशिया कप 2025 की ट्रॉफी पीसीबी और एसीसी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन काफी देर तक स्टेज पर खड़े रहे और भारतीय टीम ने उनसे ट्रॉफी लेने ना लेने का फैसला किया। इसके बाद मोहसिन नकवी स्टेज से उतरे और ट्रॉफी और मेडल सीधे अपने होटल ले गए।

इसके बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने बिना ट्रॉफी ही जश्न मनाया और वह अपने होटल चले गए। बीसीसीआई ने बाद में पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी को ट्रॉफी जल्द से वापस करने को कहा और ये तक कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो आईसीसी में इसकी शिकायत दर्ज कराएंगे।

30 सितंबर को एसीसी की वर्चुअल मीटिंग में बीसीसीआई और पीसीबी के बीच बहस-बाजी देखने को मिली, जिसमें मोहसिन ने बीसीसीआई से माफी तो मांगी, लेकिन वह अभी भी अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव खुद एसीसी के ऑफिस आकर ट्रॉफी ले लेंगे तो वह उन्हें सौंप देंगे।

इस पर बीसीसीआई ने जवाब देते हुए कहा कि वह आकर ट्रॉफी नहीं लेंगे। जब आप उनके सामने होंगे, आपको लगता है कि वह आकर ट्रॉफी ले जाएंगे?

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Uttarkashi Journalist death case : पत्रकार राजीव प्रताप की मौत का SIT करेगी मामले की जांच

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देहरादून: Uttarkashi Journalist death case  उत्तरकाशी के पत्रकार राजीव प्रताप की मौत के मामले की जांच के लिए उत्तराखंड पुलिस ने एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया है. उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक की अध्यक्षता में गठित एसआईटी सभी पहलुओं की जांच करेगी, जिसमें सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और पत्रकार के साथ आखिरी बार देखे गए लोगों के बयान शामिल हैं. उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ ने इसकी पुष्टि की.

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उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ के मुताबिक, पत्रकार राजीव प्रताप के परिवार ने बताया था कि उन्हें धमकी भरे फोन आए थे. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन एसआईटी इस पहलू की भी जांच करेगी.

डीजीपी ने बताया कि 19 सितंबर को प्रताप के लापता होने की सूचना मिलने पर पुलिस ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), ड्रोन और डॉग स्क्वॉड की मदद से व्यापक तलाशी अभियान चलाया था.

उन्होंने बताया कि प्रताप को आखिरी बार 18 सितंबर को एक सीसीटीवी फुटेज में गाड़ी चलाते हुए देखा गया था. इसके बाद दो दिन बाद 20 सितंबर को उनकी क्षतिग्रस्त कार नदी किनारे मिली थी. राजीव का शव 28 सितंबर को उत्तरकाशी जिले के जोशियाड़ा बैराज के पास मिला था. उन्होंने आगे बताया कि पत्रकार के परिवार की शिकायत के आधार पर अपहरण की प्राथमिकी दर्ज की गई है.

वहीं, उत्तरकाशी की पुलिस अधीक्षक (एसपी) सरिता डोभाल ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में राजीव प्रताप की मौत का कारण छाती और पेट में आंतरिक चोटें बताई गई हैं, जो किसी दुर्घटना से संबंधित हैं. कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं.

राजीव प्रताप की मौत को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि राजीव जी की मौत की तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए. पीड़ित परिवार को बिना किसी देरी के न्याय मिलना चाहिए.

जानिए पूरा मामला

उत्तरकाशी जिले के स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप (Uttarkashi Journalist death case) 18 सितंबर को रहस्यमयी ढंग से लापता हो गए. परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका भी जताई थी. पुलिस ने 19 सितंबर को राजीव प्रताप सिंह की गुमशुदगी दर्ज कर ली थी. राजीव प्रताप के लापता होने के दो दिन बाद यानी 28 सितंबर को उनकी कार भागीरथी नदी के बीच में मिली थी, लेकिन उसमें राजीव प्रताप नहीं थे.

बता दें कि कार राजीव के दोस्त सोबन सिंह की थी, जिससे वो 18 सितंबर को ज्ञानसू से गंगोरी के लिए रवाना हुए थे. लेकिन जब वो 19 सितंबर को नहीं लौटे से दोस्तों और परिजनों को उनकी चिंता हुई. राजीव के लापता होने के करीब दस दिन बाद उनका शव रविवार 28 सितंबर को जोशियाड़ा बैराज से मिला था. राजीव के परिजनों ने उनकी हत्या की आशंका जताई है. फिलहाल पुलिस उन मामलों की जांच कर रही है.

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RSS : आरएसएस के शताब्दी समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी

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RSS : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्र के प्रति योगदान को रेखांकित करने वाला विशेष रूप से डिजाइन एक स्मारक डाक टिकट और सिक्के को जारी किया। इस साल विजयदशमी से लेकर 2026 विजयदशमी तक संघ शताब्दी वर्ष मनाएगा।

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पीएम मोदी डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमें संघ जैसे संगठन का शताब्दी वर्ष देखने को मिल रहा है। उन्होंने स्वयंसेवकों शुभकामनाएं दीं और संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।

देशवासियों को दी महानवमी की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने समारोह के दौरान कहा, आज महानवमी है। आज देवी सिद्धिदात्री का दिन है। मैं सभी देशवासियों को नवरात्रि की बधाई देता हूं। कल विजयादशमी का महापर्व है- अन्याय पर न्याय की जीत, असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की जीत है। विजयदशमी भारतीय संस्कृति के इस विचार और विश्वास का कालजयी उद्घोष है। ऐसे महान पर्व पर 100 वर्ष पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना ये कोई संयोग नहीं था। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनरुत्थान था। जिसमें राष्ट्र चेतना, समय समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है।

उन्होंने बताया कि संघ की 100 वर्ष की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में आज भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के जारी किए हैं। 100 रुपए के सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि है।

100 साल की हुई संघ की यात्रा

गौरतलब है कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की ओर से 1925 में महाराष्ट्र के नागपुर में आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवक-आधारित संगठन के रूप में की गई थी। इसका लक्ष्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने पर है। शताब्दी समारोह न केवल आरएसएस की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान करता है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा में इसके स्थायी योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी प्रकट करता है।

पिछले 100 वर्षों में आरएसएस ने दिया महत्वपूर्ण योगदान

पिछली शताब्दी में, आरएसएस ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरएसएस के स्वयंसेवकों ने बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इसके अलावा, आरएसएस के विभिन्न सहयोगी संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, जनभागीदारी को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

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